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‘उड़ान’ ने दिया बच्चों को उनके सपनों का आकाश

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Posted By- City Web Thursday, 01 September 2016 10:29 AM

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  • सहारनपुर में कूड़े के ढ़ेर पर कूड़ा बीनते सैकड़ों बच्चों की उंगलियां इन दिनों कंप्यूटर के की बोर्ड पर दौड़ रही है। यह बच्चें आंखों में अपने स्वर्णिम भविष्य का सुखद सपना लेकर उड़ान भर रहे हैं ! इन बच्चों के सपनों को पंख लगाकर उन्हें खुला आसमान देने और समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया है शहर की एक संस्था ‘उड़ान’ ने। उड़ान के संस्थापक अजय सिंघल के मुताबिक वह जब भी देश के नौनिहालों को कूड़े के ढ़ेर पर कूड़ा बीनते या किसी ढाबे-चाय की दुकान पर काम करते देखते तो उनमें एक टीस सी उठती और इन बच्चों के लिए कुछ करने की ललक मन में जागती। अपनी इस व्यथा को उन्होंने एक ब्लॉक में लिखा तो अनेक लोगों ने उस पर न केवल सकारात्मक प्रतिक्रिया दी बल्कि एक सज्जन ने पांच बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का आश्वासन भी दिया। ऐसे बच्चों को पढ़ाने के विचार से उत्साहित हो अजय सिंघल शहर की एक स्लम बस्ती इंद्रा कैंप गए। दो हजार से अधिक लोगों की इस बस्ती में रहने वाले 400 से अधिक बच्चे कूड़ा बीनने का काम करते थे, उन्होंने कभी किसी स्कूल का मुंह ही नहीं देखा था। अजय ने बच्चों के मां बाप को समझाया कि उनके लिए पढ़ाई कितनी अनिवार्य है। इस तरह अजय ने वर्ष 2010 में ‘उड़ान बाल एवं प्रौढ़ शिक्षा केंद्र’ के नाम से एक स्कूल, एक मंदिर की छत पर शुरु किया। स्कूल की शुरुआत केवल 32 बच्चों के साथ हुयी थी जिसकी संख्या आज करीब ढाई सौ तक जा पहुंची है। कक्षा एक से कक्षा आठ तक इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में अधिकांश लड़कियां है। अजय बताते हैं कि उनके यहां पढ़ने वाले 44 बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार के तहत सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा चुका है। इन बच्चों में से तीन बच्चों ने तो अपनी क्लास में टॉप भी किया है। आज उड़ान के साथ दर्जनों लोग जुड़ चुके है और उन्हें आर्थिक मदद भी दे रहे है। उसी का परिणाम है कि आज स्कूल के पास अपना एक हॉल भी है और दूसरी मंजिल का भी निर्माण उस पर हो रहा है। इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अपनी प्रतिभा का सहारनपुर में बार बार परचम लहरा चुके है। सहारनपुर पुस्तक मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में जहां इन बच्चों ने ढे़रों पुरस्कार प्राप्त किये है वहीं विश्व योग दिवस पर संयम योगाश्रम द्वारा आयोजित योग शिविर में योग का उत्कृशट प्रदर्शन कर वाहवाही लूटी है। सच तो यह है कि ‘उड़ान’ ने इन बच्चों को उनके सपनों का आकाश उड़ने के लिए दे दिया है।

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